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ना जा ना तौं भेळू पखाण, जिदेरी घसेरी बोल्यूं माण

ना जा ना तौं भेळू पखाण, जिदेरी घसेरी बोल्यूं माण

पिछ्ली बार की तरह एक बार फिर ऑडियो कैसेट “नयुं नयुं ब्यो च“  से नरेंद्र सिंह नेगी जी द्वारा गायिका अनुराधा निराला जी की साथ गाया एक गीत प्रस्तुत कर रहे हैं। यह गीत एक और जहाँ पहाड़ की संघर्षशील नारी की जीवटता को दर्शाता है वहीं  दूसरी और सरकार द्वारा बिना सोचे समझे नीतियाँ [...]

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बिजी जा दी लाटी, बिजी जा दी लाटी……

बिजी जा दी लाटी, बिजी जा दी लाटी……

नरेन्द्र सिंह नेगी जी का यह भावपूर्ण गाना उनकी ऑडियो कैसेट “नयुं नयुं ब्यो च” में आया था बाद में इसी नाम से एक वीडियो एलबम भी निकली। एक नवविवाहिता अपने मायके आई है, अब उसके वापस ससुराल जाने का दिन आ पहुंचा है। नवविवाहिता अभी किशोरावस्था में ही है,  उसे पैदल ही ससुराल तक [...]

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मेरे को पहाड़ी मत बोलो मैं देहरादूण वाला हूं

मेरे को पहाड़ी मत बोलो मैं देहरादूण वाला हूं

नरेंद्र सिंह नेगी जी की नयी कैसेट “अब कथगा खैल्यो” बेहद पसंद की जा रही है। ऑडियो सीडी आने के बाद अब लोग इसकी वीडियो के रिलीज का इंतज़ार कर रहे हैं। “अब कथगा खैल्यो” (हिन्दी – अब कितना खाओगे?) के माध्यम से नेगी जी ने राजनीति में फैले भ्रष्टाचार पर आघात किया है। यहाँ [...]

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उत्तराखण्ड के विकास में उत्प्रेरक बन सकती हैं रेल परियोजनाएं

उत्तराखण्ड के विकास में उत्प्रेरक बन सकती हैं रेल परियोजनाएं

उत्तराखण्ड के कुल 13 जिलों में से 11 जिलों में पहाड़ी इलाके में है। यह जिले उद्योग-शून्य, कृषि क्षेत्र में पिछड़े हैं लेकिन खनिज संपदा, प्राकृतिक सौन्दर्य, वन संपदा व औषधीय वनस्पतियों से परिपूर्ण हैं। अगर इन सभी वस्तुओं का सुव्यवस्थित तरीके से सुनियोजित दोहन किया जाये तो उत्तराखण्ड भी भारत के सर्वाधिक विकसित प्रदेशों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकता है। नैनीताल और मंसूरी जैसे कुछ हिल-स्टेशन जिन्हें अंग्रेज विकसित कर गये थे, उन्हीं को स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद की सरकारों ने बढ़ावा दिया, जबकि हिमालय की तलहटी में अनेक ऐसे स्थान हैं जो नैनीताल और मंसूरी को प्राकृतिक सौन्दर्य में कहीं पीछे छोङ सकते हैं। इन दुर्गम स्थानों को विकसित करने के लिये सुगम यातायात अतिआवश्यक है। इस समय भी उत्तराखण्ड में ट्रैकिंग, राफ़्टिंग, सफारी और तीर्थयात्रा आदि के लिये लगभग एक करोड़ लोग पर्यटक प्रतिवर्ष आते हैं, यदि नये पर्यटक स्थल और सुगम रेलयात्रा का प्रबन्ध हो जाय तो यह संख्या आने वाले समय में कई गुना बढ सकती है।

उत्तराखंड का परिचय

उत्तराखंड 2 मंडलो गढ़वाल और कुमाऊँ में विभक्त है. उत्तराखंड में वर्तमान में 13 जिले हैं जिनमें से 7 गढ़वाल में – देहरादून , उत्तरकाशी , पौड़ी , टेहरी (अब नई टेहरी) , चमोली , रूद्रप्रयाग, हरिद्वार और 6 कुमाऊँ में-अल्मोड़ा , रानीखेत , पिथौरागढ़ , चम्पावत , बागेश्‍वर और उधम सिंह नगर हैं। यह उत्तर में चीन , हिमाचल प्रदेश , पूर्व में नेपाल , दक्षिण में उत्तर प्रदेश और पश्चि‍म में हरियाणा व हिमाचल प्रदेश से घिरा हुआ है। इसकी लंबाई पूर्व से पश्चिम की ओर 358 किमी और चौड़ाई उत्तर से दक्षिण की ओर 320 किमी है। यहां 70 विधानसभा सीट , 3 राज्य सभा सीट और 5 लोकसभा सीट हैं।

Padmashri Laxman Singh Jangpangi

Padmashri Laxman Singh Jangpangi

Son of Rai Saheb Soban Singh, Shri Laxman Singh was born in Burfu in Johar Valley on 24th July,1905. He belonged to a rich family. His grand father, Phannu Jangpangi was awarded with a certificate of dagger and a medal by the British Government in recognition of his cooperation with the British Administration. His father,Soban was conferred upon the title of “Rai Saheb” for his services to British administration.

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