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बोला भै-बन्धु तुमथें कनु उत्तराखण्ड चयेणुं च

बोला भै-बन्धु तुमथें कनु उत्तराखण्ड चयेणुं च

By प्रबंधक on July 22, 2010

उत्तराखण्ड राज्य प्राप्ति के लिये उत्तराखण्ड के लोगों ने लगभग 50 साल तक संघर्ष किया और एक बड़े अहिंसक आन्दोलन के फलस्वरूप अलग राज्य का निर्माण हुआ। पृथक राज्य निर्माण की मांग पीछे लोगों की यह अपेक्षाएं थी कि अपना राज्य और अपना शासन होगा तो दुश्वारियां कुछ कम होंगी और सामान्य जनता की इच्छानुसार [...]

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जी रे जागि रे, जुगराज रे तू- जी रे

जी रे जागि रे, जुगराज रे तू- जी रे

By प्रबंधक on July 9, 2010

तेजी से बदलते भारतीय समाज में अन्य भारतीय परम्पराओं के साथ- साथ संयुक्त परिवार का ताना-बाना भी टूटता जा रहा है। कैरियर और प्रतिस्पर्धा के पीछे भागते-भागते आज का युवावर्ग अपने माता-पिता के रूप में किस अमूल्य निधि का तिरस्कार करता है, उसे आभास नहीं हो पाता। बड़े शहरों में ऐसे कई बुजुर्गों की कहानी [...]

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श्यूँ बाघ, देबुआ और प्यारा सेतुआ….

श्यूँ बाघ, देबुआ और प्यारा सेतुआ….

By श्री देवेन्द्र मेवाड़ी जी on July 6, 2010

[पहाड़ों में बाघ और मानव एक साथ रहते आये हैं। इन बाघों को कुकुर बाघ, श्यूँ बाघ के नाम से भी जाना जाता रहा है। कभी कभी बाघ आदमखोर भी हो जाते हैं। नरेन्द्र सिंह नेगी जी ने "सुमा हे निहोणिया सुमा डांडा ना जा"  गीत में भी इसी तरह की एक घटना का जिक्र [...]

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ओ पार के टिकराम और ए पार की पारभती

ओ पार के टिकराम और ए पार की पारभती

By श्री देवेन्द्र मेवाड़ी जी on July 5, 2010

[पहाड़ों में बाघ और मानव एक साथ रहते आये हैं। इन बाघों को कुकुर बाघ, श्यूँ बाघ के नाम से भी जाना जाता रहा है। कभी कभी बाघ आदमखोर भी हो जाते हैं। नरेन्द्र सिंह नेगी जी ने "सुमा हे निहोणिया सुमा डांडा ना जा"  गीत में भी इसी तरह की एक घटना का जिक्र [...]

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चिलम की चिसकाटी व बकरी चोर

चिलम की चिसकाटी व बकरी चोर

By श्री देवेन्द्र मेवाड़ी जी on July 2, 2010

[पहाड़ों में बाघ और मानव एक साथ रहते आये हैं। इन बाघों को कुकुर बाघ, श्यूँ बाघ के नाम से भी जाना जाता रहा है। कभी कभी बाघ आदमखोर भी हो जाते हैं। नरेन्द्र सिंह नेगी जी ने "सुमा हे निहोणिया सुमा डांडा ना जा"  गीत में भी इसी तरह की एक घटना का जिक्र [...]

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श्यूं बाघ व नेपाली ‘जंग बहादुर’

श्यूं बाघ व नेपाली ‘जंग बहादुर’

By श्री देवेन्द्र मेवाड़ी जी on July 1, 2010

[पहाड़ों में बाघ और मानव एक साथ रहते आये हैं। इन बाघों को कुकुर बाघ, श्यूँ बाघ के नाम से भी जाना जाता रहा है। कभी कभी बाघ आदमखोर भी हो जाते हैं। नरेन्द्र सिंह नेगी जी ने "सुमा हे निहोणिया सुमा डांडा ना जा"  गीत में भी इसी तरह की एक घटना का जिक्र [...]

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अब कहां रहे वैसे श्यूं-बाघ

अब कहां रहे वैसे श्यूं-बाघ

By श्री देवेन्द्र मेवाड़ी जी on June 30, 2010

[पहाड़ों में बाघ और मानव एक साथ रहते आये हैं। इन बाघों को कुकुर बाघ, श्यूँ बाघ के नाम से भी जाना जाता रहा है। कभी कभी बाघ आदमखोर भी हो जाते हैं। नरेन्द्र सिंह नेगी जी ने "सुमा हे निहोणिया सुमा डांडा ना जा"  गीत में भी इसी तरह की एक घटना का जिक्र [...]

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गरा रा रा ऐगे रे बरखा झुकि ऐगे

गरा रा रा ऐगे रे बरखा झुकि ऐगे

By प्रबंधक on June 12, 2010

नरेन्द्र सिंह नेगी द्वारा गाये गये सभी गीतों में इस गाने की एक विशेष पहचान है। नेगी जी ने इस गाने के माध्यम से यह सजीव दृश्य सामने रखा है कि एक छोटे से गांव में अप्रत्याशित रूप से बारिश की बूंदे गिरने लगे तो सामान्य जीवन किस तरह अस्त-व्यस्त हो जाता है। आमतौर पर [...]

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इखि ई पिरथिमा ये हि जलम मां

इखि ई पिरथिमा ये हि जलम मां

By प्रबंधक on May 30, 2010

नरेन्द्र सिंह नेगी जी द्वारा गाये बहुत से गाने ऐसे है जिनमें उपमायें, भाव पूरी तरह से नये तरीके हैं। कुछ गाने आप पहले भी सुन चुके हैं जैसे रोग पुराणु कटे ज़िन्दगी नई ह्वैगे, तेरु मुल – मुल हैंसुणु दवाई ह्वैगे या फिर त्यारा रूप कि झौल मां, नौंणी सी ज्यू म्यारु । आज [...]

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साँस छिन आस-औलाद तुमारी हमारी डाली – झम्म

साँस छिन आस-औलाद तुमारी हमारी डाली – झम्म

By प्रबंधक on May 27, 2010

उत्तराखंडी लोक गायक पर्यावरण को बचाने, पेड़ों को ना काटने का संदेश देते हुए लोकगीत गाते रहे हैं। ऐसे ही कुछ गीत हम पहले ही आपको सुना चुके हैं जैसे  आवा दिदा भुलौं आवा, नांग धारति की ढकावा , डाळि बनबनी लगावा या डाल्यूं ना काटा चुचो डाल्यूं ना काटा, या फिर आज यो मेरी [...]

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धार मां कु गेणुं पार देख ऐ गे

धार मां कु गेणुं पार देख ऐ गे

By प्रबंधक on May 19, 2010

इस साइट पर आप इससे पहले नरेन्द्र सिंह नेगी जी का गाना “मुल-मुल कैकु हैंसणि छै तू” सुन चुके हैं, जिसमें एक युवती जंगलों के पौधों को अपना मित्र मानते हुए उनसे अपने दिन की बात कह रही है। इसी तरह जंगलों में अपने मवेशियों को चराने गये दल के एक पुरुष और महिला के [...]

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घाघरी का घेर, ब्योलि बौ-सैमन्या बौ

घाघरी का घेर, ब्योलि बौ-सैमन्या बौ

By प्रबंधक on May 2, 2010

प्रस्तुत गाना नेगी जी के लोकप्रिय गानों में से एक है। बारात में आया हुआ एक युवक (देवर) अपनी होने वाली भाभी (दुल्हन) के साथ सामान्य परिचय व हल्की-फुल्की मजाक कर रहा है।  ऐसे ही काल्पनिक संवाद के आधार पर यह गाना बना है। देवर अपनी भाभी के साथ परिचय बढाना चाह रहा है, और [...]

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तुम भी सूणां मिन सुणियाली, गढ़वाल ना कुमौं जालि

तुम भी सूणां मिन सुणियाली, गढ़वाल ना कुमौं जालि

By प्रबंधक on April 5, 2010

असली लोककलाकार वही है जो जनता की भावना को अपनी कला के माध्यम से प्रसारित करे। सच्चे कलाकार का यह दायित्व नरेन्द्र सिंह नेगी जी सदैव निभाते रहे हैं। पहाड़ की जनता के दुखदर्द और उनकी अपेक्षाओं को अपने गीतों के माध्यम से समाज के बीच रखने का उन्होने हमेशा प्रयास किया है। नेगी जी [...]

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पद्म पुरस्कार

  • Padmashri Laxman Singh Jangpangi
  • श्री लक्ष्मण सिंह जंगपाँगी, पद्म श्री
  • Dr. Shekhar Pathak
  • Padma Awards from Uttarakhand
  • खड्ग सिंह वल्दिया
  • यशोधर मठपाल

पर्वतारोहण

  • रतन सिंह
  • अनूप साह
  • हरीश चन्द्र सिंह रावत
  • बचेन्द्री पाल
  • सुरेन्द्र सिंह पांगती
  • लवराज सिंह धर्मशक्तू

पहाड़

  • PAHAR-People’s Association for Himalaya Area Research.
  • कितना बदला है पहाड़ों का हाल?
  • Askot-Arakot-Abhiyan-2004:Experience
  • Askot-Aarakot-Abhiyan-2004
  • प्रोफेसर शेखर पाठक से साक्षात्कार
  • अस्कोट-आराकोट गीत

प्रतिभायें

  • Mohan P. Kala-A Business Personality from Uttarakhand
  • Uktat:Satirical Poems of Harish Juyal
  • माधो सिंह भंडारी "मलेथा"
  • Madho Singh Bhandari “Maletha”
  • Gopal Babu Goswami
  • गोपाल बाबू गोस्वामी

फिल्म-जगत

  • हिमानी शिवपुरी
  • मोहन चन्द्र भंडारी
  • वरुण बडोला
  • हेमन्त पाण्डे
  • सुधीर पाण्डे
  • राकेश पाण्डे

रंगमंच

  • हरिदत्त भट्ट ‘शैलेश’
  • एहसान बख़्श (Ahsan Bakhsh)
  • निर्मल पाण्डे
  • बंशीधर पाठक ‘जिज्ञासु’
  • तिग्मांशु धूलिया
  • राजेन्द्र धस्माना

लेख

  • कैसे बचें तनाव से ?
  • मन क्यों परेशान है इस शहर में
  • नैनीताल और हिन्दी फिलमवाले
  • हमर उ नैनीताल
  • विभिन्न देशों के विभिन्न कलैंडर
  • भारतीय पंचाग की कहानी

संस्कृति

  • रंग नीलु उंचा अगास को – दिखैंणा कुई नीलु
  • सात समौंदर पार च जाणा ब्वै, जाज मां जोंलु कि ना
  • रोग पुराणु कटे ज़िन्दगी नई ह्वैगे, तेरु मुल – मुल हैंसुणु दवाई ह्वैगे
  • द्वी दिन की हौरि छ अब खैरि- मुट्ट बोटीकि रख
  • आवा दिदा भुलौं आवा, नांग धारति की ढकावा , डाळि बनबनी लगावा
  • रंग-रंगिलि बहार ऐगे होरी की

संगीत

  • उमा दत्त शर्मा (उमाशंकर ‘सतीश’)
  • हीरा सिंह राणा
  • पवनदीप राजन
  • शशि भूषण मैठाणी ‘पारस’
  • शुभा मुदगल
  • शेर सिंह पांगती

विज्ञान

  • कलैंडर का विज्ञान
  • उनके भी हैं अंदाजे़ बयां और…
  • अनजान से बना महान
  • तो, बस जाएंगे जाकर कहीं और…
  • जब चली बात फूलों की
  • लाइकेन
मेरा-पहाड़
Avatars by Sterling Adventures

मेल में पायें “अपना उत्तराखंड”

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अध्यापन. अनुवाद इतिहास कानून गीत- संगीत ग्रामीण विकास चित्रकला जन आन्दोलन पत्रकारिता पर्यावरण पर्वतारोहण पुरातत्व पुस्तक-चर्चा प्रबन्धन प्रशासन फिल्म भाषा रंगमंच लेखन विज्ञान शिक्षा शोध संगीत संपादन संस्कृति समाज सेवा सम्पादन साहित्य anuradha nirala books devendra mewari garhwali literature garhwali music garhwali song garhwali video garhwal ke lok nritya geet gopal babu goswami kumaoni folk song kumaoni music kumaoni song narendra singh negi shivanand nautiyal uttarakhandi song uttarakhandi video uttarakhand music

Narendra Singh Negi’s Songs

आवा दिदा भुलौं आवा, नांग धारति की ढकावा , डाळि बनबनी लगावाआवा दिदा भुलौं आवा, नांग धारति की ढकावा , डाळि बनबनी लगावा

द्वी दिन की हौरि छ अब खैरि- मुट्ट बोटीकि रखद्वी दिन की हौरि छ अब खैरि- मुट्ट बोटीकि रख

ना बैठ ना बैठ बिन्दी ना बैठ चरखी मां

रोग पुराणु कटे ज़िन्दगी नई ह्वैगे, तेरु मुल – मुल हैंसुणु दवाई ह्वैगेरोग पुराणु कटे ज़िन्दगी नई ह्वैगे, तेरु मुल – मुल हैंसुणु दवाई ह्वैगे

जाग जाग हे उत्तराखण्डि…..जै भारत जै उत्तराखण्ड

ठण्डो रे ठण्डो, मेरा पहाड़ै की हव्वा ठण्डी – पाणि ठण्डो

मेरा डांडी काण्ठियों का मुलुक जैल्यु…

मोटरूंको सैणुं हो यु, होटलुको खाणुं,ई डरैबरि कलैण्डरि मां

अबैरी दां तू लssम्बी छुट्टी लै के ऐई

नयु-नयु ब्यो च मिठि-मिठि छुईं लगौंलानयु-नयु ब्यो च मिठि-मिठि छुईं लगौंला

Gopal Babu Goswami’s Songs

Articles by Devendra Mewari

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