3 responses to “आज यो मेरी सुणो पुकारा, धात लगुंछो आज हिमाला”

  1. गोपाल दा की यही दूरगामी सोच और उत्तराखण्ड से जुड़ी हर चीज पर सोचने और उसे अपने गीतों के माध्यम से व्यक्त करने का अंदाज ही उन्हें अन्य लोक गायकों से अलग पंक्ति में खड़ा कर देता है। वह पंक्ति भी ऐसी जिस पंक्ति पर गोपाल दा अकेले ही खड़े थे और शायद रहेंगे भी।

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  3. every song sir gopal babu goswami is unique and beautiful.the new generation shud learn 4m them

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