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लेखक : श्री देवेन्द्र मेवाड़ी जी
पता है दोस्तो, एक समय ऐसा भी था जब धरती पर फूल नहीं थे! करोड़ों वर्ष पहले की बात है। धरती पर चारों ओर बड़े-बड़े दलदल फैले हुए थे। उनमें ऊंचे-ऊंचे मॉस और फर्न के पेड़ उगते थे। दलदलों में विशालकाय डायनोसॉर विचरते थे। फिर ऐसे पेड़ों का जन्म हुआ जिनमें काठ के फल और [...]
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Posted in विज्ञान | Tagged विज्ञान, de materia medica, devendra mewari, flora and fauna, flowers, scientific article on flowers |
लेखक : श्री देवेन्द्र मेवाड़ी जी
दोस्ती हो तो लाइकेन जैसी! हां दोस्तो, प्रकृति में लाइकेन अटूट दोस्ती का बेमिसाल नमूना है। इसमें दो दोस्त अटूट बंधन में बंध जाते हैं। दोस्ती का ऐसा बंधन जो जीते-जी टूट नहीं सकता। इस दोस्ती के कारण उनको पहचानना तक कठिन हो जाता है। इस दोस्ती में वे बिल्कुल नया रूप रख लेते हैं [...]
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Posted in विज्ञान, विज्ञान-कथा | Tagged विज्ञान, botany, devendra mewari, flora and fauna, fungi, lichen |
लेखक : श्री देवेन्द्र मेवाड़ी जी
दोस्तो, बताओ तो जरा फूल कब खिलते हैं? साल भर? चलो मान लिया साल भर खिलते हैं। लेकिन, कौन-सा फूल कब खिलता है? कुछ फूल गर्मियों में खिलते हैं, कुछ वर्षा ऋतु में, कुछ सर्दियों में और बहुत सारे फूल वसंत ऋतु में। ठीक है? लेकिन, एक फूल ऐसा भी है जो 12 वर्ष बाद [...]
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Posted in विज्ञान, विज्ञान-कथा | Tagged विज्ञान, blue kurinji, devendra mewari, flora and fauna, munnar, stamp on blue kurinji |
लेखक : श्री देवेन्द्र मेवाड़ी जी
चलो दोस्तो, इस भीषण गर्मी में चलते हैं दीमकों के ठंडे-ठंडे कूल-कूल वातानुकूलित घर में। वह दीमकों की बांबी कहलाता है। और, उसमें एक-दो सौ नहीं कभी-कभी तो लाखों दीमकें रहती हैं। बांबी में उनकी पूरी बस्ती बसी रहती है। तुमने कभी दीमकों की बांबी देखी हैं? अगर देखी है तो तुमने यह भी देखा [...]
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Posted in विज्ञान, विज्ञान-कथा | Tagged विज्ञान, devendra mewari, termite |
लेखक : श्री देवेन्द्र मेवाड़ी जी
अब, सच्ची बात तो यह है कि हमारे गांव में हमीं जो क्या रहने वाले ठैरे, और भी बाशिंदे हुए वहां के। आप ‘गोरु-बाछ-बाकार’ सोच रहे होंगे। वे तो हुए ही। बल्कि वे ही क्यों, सिरु-बिरालू और ढंट कुकर भी तो हमारे घरों में ही रहने वाले हुए। मगर इनके अलावा भी मेरे गांव के [...]
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Posted in राज्य, लेख | Tagged ababeel, birds, birds from uttarakhand, devendra mewari, flora and fauna, ghghuti, ghinodi |
लेखक : श्री देवेन्द्र मेवाड़ी जी
दोस्तो, चलो परियों की बातें करते हैं। हंसती, खिलखिलाती सुंदर परियों की। सोन परी, नील परी, लाल परी! अच्छा बताओ, तुम्हें कहां मिलती थीं वे परियां? परी कथाओं में? हमने अपनी आंखों से उन्हें कभी नहीं देखा, लेकिन जब भी कोई परी कथा पढ़ी तो वे हमारे मन के ऊंचे आसमान में उड़ने लगीं। हमारे [...]
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Posted in विज्ञान, विज्ञान-कथा | Tagged alice in wonderland, विज्ञान, विज्ञान-कथा, devendra mewari, fairy tale, jurasic park, panchtantra |