साँस छिन आस-औलाद तुमारी हमारी डाली – झम्म
उत्तराखंडी लोक गायक पर्यावरण को बचाने, पेड़ों को ना काटने का संदेश देते हुए लोकगीत गाते रहे हैं। ऐसे ही कुछ गीत हम पहले ही आपको सुना चुके हैं जैसे आवा दिदा भुलौं आवा, नांग धारति की ढकावा , डाळि बनबनी लगावा या डाल्यूं ना काटा चुचो डाल्यूं ना काटा, या फिर आज यो मेरी [...]
धार मां कु गेणुं पार देख ऐ गे
इस साइट पर आप इससे पहले नरेन्द्र सिंह नेगी जी का गाना “मुल-मुल कैकु हैंसणि छै तू” सुन चुके हैं, जिसमें एक युवती जंगलों के पौधों को अपना मित्र मानते हुए उनसे अपने दिन की बात कह रही है। इसी तरह जंगलों में अपने मवेशियों को चराने गये दल के एक पुरुष और महिला के [...]
घाघरी का घेर, ब्योलि बौ-सैमन्या बौ
प्रस्तुत गाना नेगी जी के लोकप्रिय गानों में से एक है। बारात में आया हुआ एक युवक (देवर) अपनी होने वाली भाभी (दुल्हन) के साथ सामान्य परिचय व हल्की-फुल्की मजाक कर रहा है। ऐसे ही काल्पनिक संवाद के आधार पर यह गाना बना है। देवर अपनी भाभी के साथ परिचय बढाना चाह रहा है, और [...]
तुम भी सूणां मिन सुणियाली, गढ़वाल ना कुमौं जालि
असली लोककलाकार वही है जो जनता की भावना को अपनी कला के माध्यम से प्रसारित करे। सच्चे कलाकार का यह दायित्व नरेन्द्र सिंह नेगी जी सदैव निभाते रहे हैं। पहाड़ की जनता के दुखदर्द और उनकी अपेक्षाओं को अपने गीतों के माध्यम से समाज के बीच रखने का उन्होने हमेशा प्रयास किया है। नेगी जी [...]
रंग नीलु उंचा अगास को – दिखैंणा कुई नीलु
नरेन्द्र सिंह नेगी के गानों में कोमल मानवीय भावनाएं तथा जीवन का सार अन्तर्निहित रहता है। यह सुन्दर गाना देखिये-एक युवक किसी अत्यन्त सुन्दर युवती से कुछ सवाल पूछ रहा है। सामान्य रूप से देखने पर इस गाने के बोल प्रेमी द्वारा प्रेमिका को रिझाने के लिये बोले गये संवाद प्रतीत हो सकते हैं, लेकिन [...]
सात समौंदर पार च जाणा ब्वै, जाज मां जोंलु कि ना
नरेन्द्र सिंह नेगी जी के अधिकांश गीत पारम्परिक लोकसंगीत की विभिन्न विधाओं पर आधारित होते हैं। प्रस्तुत लोकगीत "खुदेड़ गीत" का एक बेहतरीन उदाहरण है। "खुदेड़ गीत" उत्तराखण्ड के विरह वेदना, स्मृति और वियोग से भरे पारम्परिक गीत हैं। (खुद+एड़, खुद = क्षुधा या उत्कन्ठा)। नेगी जी की आवाज में ही एक अन्य खुदेड़ गीत [...]
रोग पुराणु कटे ज़िन्दगी नई ह्वैगे, तेरु मुल – मुल हैंसुणु दवाई ह्वैगे
नरेन्द्र सिंह नेगी जी ने बहुत से प्रेम-गीत गाये हैं लेकिन उनके गाये कुछ प्रेम गीत ऐसे हैं जिसमें प्रेम को लेकर एक नये तरीके के उपमानों का प्रयोग किया गया है उदाहरण के लिये उनके गाये त्यारा रूप कि झौल मां, नौंणी सी ज्यू म्यारु को ही लें जिसमें उन्होने प्रेमिका के रूप की [...]



