3 responses to “भुरु भुरु उज्वाऊ हैगो”

  1. सुबह-सुबह इस गीत को सुनते ही शरीर में एक नई स्फुर्ति का संचार हो जाता है। लेकिन अब ऐसा कहां—-

    घर-घरु मां नलो को पाणी, स्याणी कुणे (बैग धैं) भर तू पाणी,

    खुट्यो मां झंवर को पैणो? हिल का सैंडिल पट्ट-पट्ट।

    गैल पातला मशीनों की घराट(उत्तराखण्ड में सभी नदियों में हाइड्रो प्रोजेक्ट बन रहे हैं),

    घुघुती-कफुवा भाजी गैना, शिवजी कूनी मैं ले हिटूं…………।

  2. I need to download all mp3 of gopal babu goswami, how can i download those.

    Thanks,

    MOHAN

  3. bahut hee sundar geet …vo bhee Gopal Babu Goshwami ji ke behad meethe swar main….bheetar tak khushiyan aur jeewan urja ka sanchaar kar dete hain.

    Abhaar

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