प्रबंधक

उत्तराखंड से संबंधित समस्त जानकारी इंटरनैट पर लाने का संकल्प लिये एक अदना सा व्यक्ति। अपने फोरम और मेरा पहाड़ के साथ प्रयासरत।

2 responses to “भुरु भुरु उज्वाऊ हैगो”

  1. सुबह-सुबह इस गीत को सुनते ही शरीर में एक नई स्फुर्ति का संचार हो जाता है। लेकिन अब ऐसा कहां—-
    घर-घरु मां नलो को पाणी, स्याणी कुणे (बैग धैं) भर तू पाणी,
    खुट्यो मां झंवर को पैणो? हिल का सैंडिल पट्ट-पट्ट।
    गैल पातला मशीनों की घराट(उत्तराखण्ड में सभी नदियों में हाइड्रो प्रोजेक्ट बन रहे हैं),
    घुघुती-कफुवा भाजी गैना, शिवजी कूनी मैं ले हिटूं…………।

  2. I need to download all mp3 of gopal babu goswami, how can i download those.

    Thanks,
    MOHAN

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