5 responses to “द्वी दिन की हौरि छ अब खैरि- मुट्ट बोटीकि रख”

  1. उत्तराखण्ड में तो लगता है कि मुट्टी बोटिक रखने की जरुरत हमेशा ही रहेगी। पहले बाहरी लोगों के लिये मुट्ठियां तनती थीं, अब अपने लोगों के लिये भी मुट्ठियां ताननी पड़ रही हैं। ये भी एक विडम्बना ही है।

  2. bahut accha gana hai……लगता है की मुठिया ताननी ही पड़ेंगी..

  3. Fully agree with Ghingaru jee. Satya bachan kaha aapne.
    Raj Pithoragariya

  4. bahut hi badhiya gana hai,

  5. क्या गजब का गीत लिखा और स्वर दिया है नेगी जी ने। उत्तराखंड मिल गया है लेकिन आज राज्य के जैसे हालात हैं उससे यह गीत आज भी उतना ही प्रासांगिक है।

Leave a Reply