श्री देवेन्द्र मेवाड़ी जी

जन्मः 7 मार्च 1944 शिक्षाः एम.एस-सी. (वनस्पति विज्ञान), एम.ए. (हिंदी), पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा, पीएच.डी शोध छात्र। अनुभवः विगत 44 वर्षों से हिंदी में नियमित रूप से विज्ञान लेखन, अनुवाद और संपादन। ‘विज्ञान प्रसार’ फैलो (2007-08)। दो विज्ञान कथा संग्रहों सहित लोकप्रिय विज्ञान की 12 पुस्तकें प्रकाशित प्रमुख कृतियां : ‘भविष्य’, ‘कोख’ (विज्ञान कथा संग्रह), ‘विज्ञान प्रसंग’, ‘हार्मोन और हम’, ‘सूरज के आंगन में’, ‘विज्ञान बारहमासा’, ‘सौरमंडल की सैर’, ‘फसलें कहें कहानी’, ‘प्युओं की प्यारी दुनिया’ आदि (लोकप्रिय विज्ञान), हमारे पक्षी, जीन और जीवन, कहानी रसायन विज्ञान की (अनुवाद)। तेरह वर्ष तक मासिक कृषि पत्रिका ‘किसान भारती’ का संपादन। आकाशवाणी तथा टेलीविजन के लिए विज्ञान नाटक/पटकथा लेखन, वैज्ञानिक विषयों पर व्याख्यान। पुरस्कार/सम्मानः उत्कृष्ट विज्ञान लेखन के लिए प्रतिष्ठित ‘आत्माराम पुरस्कार’ (2005), विज्ञान लोकप्रियकरण के लिए राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार) का राष्ट्रीय पुरस्कार (2000), भारतेंदु हरिश्चंद्र राष्ट्रीय बाल साहित्य पुरस्कार (1994-99 तथा 2002), उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान पुरस्कार (1978-79) तथा विज्ञान परिषद प्रयाग द्वारा स्तरीय विज्ञान लेखन के लिए सम्मानित (1986) तथा ‘विज्ञान’ का ‘देवेंद्र मेवाड़ी सम्मान अंक’ प्रकाशिअत (2006)। प्रतिष्ठित संस्थाओं में समय-समय पर वैज्ञानिक विषयों पर व्याख्यान। पूरा परिचय पढ़ें

7 responses to “घुघुती बासेंछी मेरा देश”

  1. आदरणीय मेवाड़ी जी का यह सुन्दर लेख पढ कर मन भावविभोर हो गया. पहाड़ में बिताये बचपन की यादें और सभी चिड़िया-पखेरु पुन: याद हो गये. मेरे बचपन का एक हिस्सा गुलेल लेकर चिड़ियों के पीछे भागने में भी गुजरा, गुलेल से चिड़िया को नुकसान पहुंचाने का मकसद कतई नही होता था, लेकिन उन्हें हाथ में लेकर नजदीक से महसूस करने का मन बहुत करता था.

    घिनौड़ियों (गौरैया)को जिन्दा पकड़ने का एक अनूठा तरीका भी बता देता हूँ. हम लोग सूप को खड़ा करके एक छोटे डण्डे से अटका देते थे. और उस डण्डे में एक धागा बांध कर दूर बैठ जाते थे. जैसे ही खड़े सूप के नीचे पड़े दानों को खाने चिड़िया आती डण्डा सरका कर सूप से उसे ढक देते. हालांकि बहुत कम मौकों पर ही चिड़िया को फंसा पाना सम्भव होता था.

    मेवाड़ी जी के लिखे ऐसे ही जानदार लेख पढने को मिलते रहेंगे ऐसा विश्वास है.

  2. Mewadi Ji – Very very thank you

  3. अभी-अभी पहाड़ से एक महीने बाद लौटा हूं, आपके इस लेख को पढ़कर फिर से मन पहाड़ पहुंच गया।

  4. Excellent article by Devenedra Ji.

    Ghughuti is one of the famous bird of Uttarkahand. I see a lot of Folk songs have been made ghughuti.

    Ghughuti bird ko naryee ka parteek mana gaya hai. ( in think so). if we go through the lyric of songs.

  5. Excellent article by shri Devenedra Ji. Aap ne garhwal ki yaad taja kar de hai, Hamare Uttrakhand ke logon ke pas he asi payari yado ko sabado me pironi ki kala aati hai.beautiful articles.

    Expect more such articles.

  6. very nice article. Bachpan ka ahsaas gaon ki yadan sab kuch jaise is article me hi sim gaya ho itne se sabdo itna vistar. It’s really amazing. thanx

  7. the story of sash bahu is realy intrested because I heared that story from my ama at my childhood.

    thanks

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