4 responses to “इखि ई पिरथिमा ये हि जलम मां”

  1. इस गीत की प्रशंसा करने के लिये मेरे पास शब्द नहीं ठैर महाराज।

  2. bahut acha laga gana sunkar

  3. मेरा तो भ्रम ही होगा..सपनो से कभी पाला पड़ता नही अपना..
    पर अगर भ्रम भी है तो इसी पृथ्वी मै ही आया है यें भ्रम…
    इस गाने को भावार्थ करने के लिये आप ने अपने दिल को एक प्रेमी के दिल के रूप मे जरुर ढाला होगा……
    आप की इस उपलब्धि को प्रणाम…
    आज आप के दिल की परीक्षा भी हों गयी…इतना सुंदर गाना आप ने भावार्थ कर दिया..
    शब्दों मे आप का धन्यवाद् क्या करू मै..दिल से आपको प्रणाम करता हूं……

  4. पैण = गाँव की किसी भी बहु (ब्वारी ) के मायके से आया भोज (पूड़ी. पकोड़ी .अरसा .स्वाल.) जो पूरेगाँव या अपनी बिरादरी में बाटा जाता है , थोडा मिलता है और परिवार में भी बाँटना भी होता है इस लिए स्वादिष्ट लगता है।

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