One response to “मेरि आंख्यूं का रतन बाला स्ये जादी”

  1. आंखे भर आई, बचपन की याद हो आई, जब मां स्कूल जाने के लिये जल्दी-जल्दी तैयार होते हुये, घर के सारे काम निपटाते हुये, मुझे कुछ ऐसा ही कहती थी। उसके मन पर क्या बीतती होगी कि अपने बच्चे को लगभग अकेले छोड़कर जाना…., अब जान पाया, जब मैं भी बाप बन गया।

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