रवीन्द्र सिंह बिष्ट (Ravidra Singh Bisht)
(माताः श्रीमती हरिप्रिया बिष्ट, पिताः श्री लाल सिंह बिष्ट)
जन्मतिथि : 2 जनवरी 1944
जन्म स्थान : भीमताल
पैतृक गाँव : निशौला जिला : नैनीताल
वैवाहिक स्थिति : विवाहित बच्चे : 2 पुत्र
शिक्षा : पी.एच-डी.
प्राथमिक शिक्षा- अल्मोड़ा, भवाली और भीमताल के स्कूल
हाईस्कूल- एल.पी.हा.से., स्कूल भीमताल
इण्टर- रा.इ.का. नैनीताल
बी.ए.- डी.एस.बी. कालेज नैनीताल
एम.ए.- लखनऊ विश्वविद्यालय
पी.जी. डिप्लोमा (पुरातत्व)- स्कूल आफ आर्कियोलॉजी
पीएच. डी.- कुमाऊँ विश्वविद्यालय
जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ः सन् 1974 में जब हरियाणा के बणावली स्थान पर ए.एस.आई. की ओर से स्वतंत्र रूप से बड़ी उत्खनन की आज्ञा मिली।
प्रमुख उपलब्धियाँ : 1. गुजरात में एक विशिष्ट हड़प्पाकालीन नगर के अवशेषों की खुदाई।
2. हरियाणा में भी एक हड़प्पा-कालीन तथा पूर्ववर्ती व परवर्ती संस्कृतियों की खोज। 3. बिहार में प्राचीन प्रसिद्ध नालन्दा वि.वि. में उत्खनन द्वारा पूर्णवर्मा निर्मित मंदिर में प्राचीन भित्ति चित्रों का अनावरण।
4. कश्मीर घाटी में सेंमंथन (अनन्तनाग) नामक स्थान में लौहयुग व इसके पूर्ववर्ती एवं परवर्ती संस्कृतियों के श्रृंखला का उत्खनन द्वारा खोज।
5. ऋग्वेद का पुरातात्विक दृष्टि से विवेचन।
सम्प्रतिः संयुक्त महानिदेशक, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, भारत सरकार, दिल्ली-110 001
युवाओं के नाम संदेशः छोटी परियोजनाओं जैसे- डेरी, मुर्गी पालन, फूलों की खेती, मत्स्य पालन, सब्जी उत्पादन, औषधीय पौधों की खेती, सुअर पालन आदि के जरिए स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने चाहिए। सभी स्रोतों से जल प्रबन्ध पर विशेष ध्यान देना चाहिए। छोटे-छोटे माइक्रो हाइडिल पावर हाउस लगाने का प्रयास करें।
विशेषज्ञता : पुरातत्व, इतिहास, उत्खनन, प्रबन्धन.
नोट : यह जानकारी श्री चंदन डांगी जी द्वारा लिखित पुस्तक उत्तराखंड की प्रतिभायें (प्रथम संस्करण-2003) से ली गयी है।



sir mujhe machhali palan,murgi palan etc.ke bare me sari jankari chahiye.sanstawo k pate bhi jo ye batati ho ki kaise palan kiya jaye.