2 responses to “चिलम की चिसकाटी व बकरी चोर”

  1. दूसरा वाला किस्सा बहुत ही मजेदार था, हो सकता है यह सच भी हो। वैसे होश उड़ जाना को पहाड़ी में क्या कहते हैं?…..वही हो गया होगा।

  2. किलै, होश्शै उड़गै हुनैल… हपकपाल रैगै हुनैल…वीक परानै सुकि गै हुनैल। और हां, य किस्स नैं भै बल्कि सांची बात छ ।

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