ठण्डो रे ठण्डो, मेरा पहाड़ै की हव्वा ठण्डी – पाणि ठण्डो
पहाड़ और ठण्ड – दोनों शब्द एक दूसरे के पूरक लगते हैं। पहाड़ शब्द सुनते ही ऐसा लगता है जैसे कहीं दूर से आती हुई किसी ठण्डे, निर्मल हवा के झौंके ने दिल-दिमाग को ठण्डा कर दिया हो। पहाड़ से जुडे इसी शीतलता के अहसास को नरेन्द्र नेगी जी ने इस बेहद सुन्दर गाने में [...]
कनु लड़िक बिगड़ि म्यारु ब्वारी कैर की
नरेन्द्र सिंह नेगी जी का गाया गीत “कनु लड़िक बिगड़ि म्यारु ब्वारी कैर की” एक बूढ़े हो चले माँ बाप की व्यथा-कथा है। वैसे तो अपनी सन्तान का पालन-पोषण करने के पीछे किसी भी माता-पिता का कोई स्वार्थ नहीं होता, लेकिन कहीं न कहीं यह आशा जरूर होती है कि बुढापे में जब उनका शरीर [...]
शशि भूषण मैठाणी ‘पारस’
31 मई 2001 को उत्तर भारतीय गीत संध्या का आयोजन, जिसमें प्रख्यात पण्डवानी गायिका तीजनबाई, गलज गायक सरयू प्रसाद भारती, गायिका मीटा सुब्बा आदि कलाकारों ने भाग लिया।
शेर सिंह पांगती
शिक्षण-अध्यापन 33 साल। ब्रजेन्द्रलाल शाह के सत्संग में रहने से। ‘जोहार के स्वर’ (1984), ‘उत्तराखण्ड के भोटांतिक’, ‘स्वतंत्रता सेनानी का जीवन संघर्ष’ (1994), ‘मुनस्यारी लोक और साहित्य’ (2001)। दो किताबें प्रकाशनाधीन। दो बार कैलास मानसरोवर, एवरेस्ट बेस तथा न्यूजीलैण्ड आदि स्थानों की यात्राएँ की। मिलम में जड़ी, बूटी उत्पादन का प्रयास। 2002 में अपने सीमित संसाधनों से जोहार पर केन्द्रित संग्रहालय की स्थापना। 1956 से कुमाउँनी रामलीला का दरकोट (मुनस्यारी)में संचालन।
पूर्णिमा पाण्डे
उ.प्र. राज्य संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार. रोटरी क्लब लखनऊ द्वारा सम्मानित. नेशनल स्कॉलरशिप फॉर हायर स्टडीज इन कथक डान्स, भारत सरकार. कथक नृत्यांगना के रूप में कनाडा, अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, दक्षिण अमेरिका, सूरीनाम, गयाना एवं श्रीलंका आदि देशों में भारत का प्रतिनिधित्व किया. भातखण्डे संगीत महाविद्यालय में कथक नृत्य की शिक्षिका के रूप में प्रवक्ता, रीडर, प्रोफेसर व निदेशक आदि पदों पर रहते हुए अनेक विद्यार्थियों को सफल प्रशिक्षण दिया. विद्यार्थियों के लिए ‘नृत्यांजलि’ नामक ऑडियो कैसेट तैयार किया. ‘फ्लेमेंको का एक तुलनात्मक अध्ययन और कथक’ विषय पर शोध प्रबंध पीएच.डी. डिग्री हेतु प्रस्तुत। 7वें विश्व सम्मेलन पारामारिबो, सूरीनाम में भारत का प्रतिनिधित्व.
निर्मल पाण्डे
युगमंच, नैनीताल से अभिनय की शुरुआत। ‘तारा आर्ट ग्रुप’ लंदन द्वारा रंगमंचीय कार्य कलाप हेतु आमंत्रित। रंगमंच के क्षेत्र में लंदन, फ्रांस, आस्ट्रेलिया, जापान में गहन कार्य। 1997 के ‘कांस’ फिल्म महोत्सव में ‘बैंडिट क्वीन’ के शो के अवसर पर शेखर कपूर के साथ आमंत्रित। फिल्म ‘दायरा’ में ट्रान्स वैसटाइट की भूमिका निभाने पर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का वालेंतिये पुरस्कार पाने वाले विश्व के प्रथम अभिनेता। टाइम्स ऑफ इण्डिया द्वारा किये गये एक सर्वेक्षण में शताब्दी के 100 चर्चित लोगों में शामिल। ‘संवेदना’ नाटक ग्रुप का गठन, जिसका नाटक ‘अंधायुग’ रंगमंचीय जगत में व्यापक चर्चा का विषय बना। एलबम ‘गब्बर मिक्स’ के लिये चैनल वी अवार्ड से सम्मानित। फिल्म टी.वी. के साथ-साथ रंगमंचीय क्षेत्र में सक्रियता से कार्य। । शेखर कपूर कृत ‘बैंडिट क्वीन’ से फिल्म अभिनय प्रारम्भ। फिर आगे बढ़ते चले गये। ‘शिकारी’, ‘ट्रेन टू पाकिस्तान’, ‘औजार’, ‘इस रात की सुबह नहीं’, ‘दायरा’, ‘हम तुम पे मरते हैं’, ‘जहाँ तुम ले चलो’, ‘गॉड मदर’, ‘प्यार किया तो डरना क्या’, आदि अनेकों फिल्मों में अभिनय। अनेक पुरस्कार तथा कुछ फिल्में निर्माणाधीन। एक एलबम ‘जज्बा’ भी जारी हुआ.
अलख नाथ उप्रेती
स्कूली जीवन से ही रंगमंच, सांस्कृतिक गतिविधियों व खेलकूद में भागीदारी। बॉक्सिंग चैंपियन।हाईस्कूल के दौरान मार्क्सवादी साहित्य से परिचय।प्रगतिशील सांस्कृतिक आंदोलन में हिस्सेदारी। विश्वविद्यालयी जीवन में ‘इप्टा’ में सक्रिय। कालांतर में मोहन उप्रेती के नेतृत्व में अल्मोड़ा के विख्यात ‘लोक कलाकार संघ’ के सक्रिय सदस्य। पुरागामी व दकियानूसी मूल्यों के खिलाफ सतत संघर्षरत। 1986 में पहली कुमाउँनी फिल्म ‘मेघा आ’ में अभिनय। 1993 से ‘सांस्कृतिक क्रांति मंच’ के जरिये नौजवानों में क्रांतिकारी उत्तराखण्ड के निर्माण के लिए समर्पित।



