विजय कुमार किचलू
कलकत्ता की प्रसिद्ध संगीत शोध अकादमी के संस्थापक सदस्य। यह स्वतंत्र भारत का पहला ऐसा प्रयोग है जिसमें ‘गुरु-शिष्य परम्परा’ पर आधरित शिक्षण पद्धति अपनाई गई। 20 वर्षों के अल्प समय में इस संस्था ने देश को चुनिंदा उत्कृष्ठ गायक दिए हैं। युवाओं के नाम संदेशः हमारी प्रदर्शन कलाएं न सिर्फ़ हमारे खजाने हैं, बल्कि सारे विश्व में इसे सम्मान मिलने लगा है। नई पीढ़ी को इन्हें समझना सीखना होगा। और यदि वह ऐसा करती है तो निश्चय ही उसे बौद्धिक एवं आध्यात्मिक स्तर पर अप्रतिम आनंद प्राप्त होगा।
प्रसून जोशी
राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय विज्ञापनों में पुरस्कार। शुभा मुदगल तथा ‘सिल्क रूट’ के ऊपर चार सुपर हिट ‘एलबम्स’ में धुन रचना के लिए पुरस्कार। फिल्म ‘लज्जा’, ‘आंखें’, ‘क्यों’ में संगीत दिया। तीन पुस्तकें प्रकाशित कीं। ‘ठण्डा मतलब कोका कोला’ एवं ‘बार्बर शॉप-ए जा बाल कटा ला’ जैसे प्रचलित विज्ञापनों हेतु अन्तर्राष्ट्रीय मान्यता मिली।
अनूप जलोटा
1976 में फिल्म शिरडी के साईं बाबा के लिए गायन।
प्रमुख उपलब्धियां : गजल तथा भजन गायक के रूप में अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति; उ.प्र. संगीत नाटक अकादमी से पुरस्कृत।





