Browse: Home / flora and fauna
By श्री देवेन्द्र मेवाड़ी जी on October 6, 2009
पता है दोस्तो, एक समय ऐसा भी था जब धरती पर फूल नहीं थे! करोड़ों वर्ष पहले की बात है। धरती पर चारों ओर बड़े-बड़े दलदल फैले हुए थे। उनमें ऊंचे-ऊंचे मॉस और फर्न के पेड़ उगते थे। दलदलों में विशालकाय डायनोसॉर विचरते थे। फिर ऐसे पेड़ों का जन्म हुआ जिनमें काठ के फल और [...]
Posted in विज्ञान | Tagged विज्ञान, de materia medica, devendra mewari, flora and fauna, flowers, scientific article on flowers |
By श्री देवेन्द्र मेवाड़ी जी on September 21, 2009
दोस्ती हो तो लाइकेन जैसी! हां दोस्तो, प्रकृति में लाइकेन अटूट दोस्ती का बेमिसाल नमूना है। इसमें दो दोस्त अटूट बंधन में बंध जाते हैं। दोस्ती का ऐसा बंधन जो जीते-जी टूट नहीं सकता। इस दोस्ती के कारण उनको पहचानना तक कठिन हो जाता है। इस दोस्ती में वे बिल्कुल नया रूप रख लेते हैं [...]
Posted in विज्ञान, विज्ञान-कथा | Tagged विज्ञान, botany, devendra mewari, flora and fauna, fungi, lichen |
By श्री देवेन्द्र मेवाड़ी जी on September 20, 2009
दोस्तो, बताओ तो जरा फूल कब खिलते हैं? साल भर? चलो मान लिया साल भर खिलते हैं। लेकिन, कौन-सा फूल कब खिलता है? कुछ फूल गर्मियों में खिलते हैं, कुछ वर्षा ऋतु में, कुछ सर्दियों में और बहुत सारे फूल वसंत ऋतु में। ठीक है? लेकिन, एक फूल ऐसा भी है जो 12 वर्ष बाद [...]
Posted in विज्ञान, विज्ञान-कथा | Tagged विज्ञान, blue kurinji, devendra mewari, flora and fauna, munnar, stamp on blue kurinji |
By श्री देवेन्द्र मेवाड़ी जी on September 17, 2009
अब, सच्ची बात तो यह है कि हमारे गांव में हमीं जो क्या रहने वाले ठैरे, और भी बाशिंदे हुए वहां के। आप ‘गोरु-बाछ-बाकार’ सोच रहे होंगे। वे तो हुए ही। बल्कि वे ही क्यों, सिरु-बिरालू और ढंट कुकर भी तो हमारे घरों में ही रहने वाले हुए। मगर इनके अलावा भी मेरे गांव के [...]
Posted in राज्य, लेख | Tagged ababeel, birds, birds from uttarakhand, devendra mewari, flora and fauna, ghghuti, ghinodi |
Page 1 of 11