छबीलो गढ़वाल मेरो,रंगीलो कुमाँऊं…
उत्तराखंड की भूमि जहां एक और अपने सुन्दरता के लिये प्रसिद्ध है वहीं यह वीरों, क्रांतिकारियों की भूमि भी रही है। इन दोनों बातों को गोपाल बाबू गोस्वामी ने अपने एक बहुत ही प्रसिद्ध गाने में बखूबी रखा है। “छबीलो गढ़वाल मेरो, रंगीलो कुमाँऊं” आज एक ऐसा जुमला है पूरे उत्तराखंड के सौन्दर्य को दर्शाने [...]
माधो सिंह भंडारी "मलेथा"
माधो सिंह भंडारी जिन्हे माधो सिंह मलेथा भी कहा जाता है का जन्म सन 1595 के आसपास टिहरी जनपद के मलेथा गांव में हुआ था। वह एक प्रतिष्टित परिवार से थे। उनके पिता सोणबाण कालो भंडारी अपने वीरता के लिये प्रसिद्ध थे। तत्काली गढ़वाल नरेश ने इनकी बुद्धिमता और वीरता से प्रभावित होकर एक बड़ी [...]
Madho Singh Bhandari “Maletha”
Madho singh Bhandari, also called as Madho singh “Maletha”, was born around 1595 in village Maletha of Tehri district. He was from a well known family. His father,warrior Sonban Kalo Bhandari, was from Lakhanpuri. He was famous for his bravery in that region.Then Garhwal king was so impressed with his bravery and intelligence that he [...]
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