मेरे को पहाड़ी मत बोलो मैं देहरादूण वाला हूं
नरेंद्र सिंह नेगी जी की नयी कैसेट “अब कथगा खैल्यु” बेहद पसंद की जा रही है. आडियो सीडी आने के बाद अब लोग इसकी वीडियो के रिलीज का इंतज़ार कर रहे हैं. “अब कथगा खैल्यु” (हिन्दी – अब कितना खाओगे?) के माध्यम से नेगी जी ने राजनीति में फैले भ्रष्टाचार पर आघात किया है। यहाँ [...]
त्यारा रूप कि झौल मां, नौंणी सी ज्यू म्यारु
नरेन्द्र सिंह नेगी जी एक गायक व संगीतकार होने के साथ-साथ एक बहुत अच्छे कवि भी हैं। यह उनके द्वारा लिखे गये गीतों में स्पष्ट दिखता भी है। आज हम उनका एक ऐसा ही गीत प्रस्तुत कर रहे हैं जिसके बोल किसी भी सुनने वाले को भाव-विभोर कर देंगे। “त्यारा रूप कि झौल मां, नौंणी [...]
हे दिल्ली वाळा द्यूरा-हे दिल्ली वाळा
नरेन्द्र सिंह नेगी जी व मीना राणा द्वारा गाया गया यह सुन्दर गाना 2008 में रिलीज हुई उनकी एलबम “मायाकु मुण्डारो” से है। एक सीधी-सरल ग्रामीण महिला का पति दिल्ली में नौकरी करता है और कई सालों से उसकी कोई सूचना नहीं मिली है। दिल्ली में काम करने वाला एक दूसरा युवक जब गांव में [...]
गौळा मां बडुळि, मेरि पैत्वाल्युं पराज
अपने मूल से उखड़ कर तो एक पौधा भी सूख जाता है, मनुष्य भला कैसे अपनी जन्मभूमि से बिछड़ कर सुखी रह सकता है। नरेन्द्र नेगी जी ने इस गाने के माध्यम से अपने पैतृक गांव और परिवार से दूर रह रहे एक प्रवासी पहाड़ी पुरुष की तड़प व्यक्त की है। शहर की तेज दौड़ती [...]
तेरि पिड़ा मां दुई आंसु मेरा भि
नरेन्द्र सिंह नेगी जी के गीतों में अन्तर्निहित भावों की सुन्दरता को आपने इससे पहले भी कई गीतों में इस साइट पर महसूस किया होगा। यही अन्तर्निहित भाव उनके गीतों अधिक सुन्दर व अर्थपूर्ण बनाते है। आज हम ऐसा ही भावनापूर्ण गीत आपके सामने लेकर आ रहा हैं। इस गीत में पहाड़ के अधिकांश विवाहित [...]
बोला भै-बन्धु तुमथें कनु उत्तराखण्ड चयेणुं च
उत्तराखण्ड राज्य प्राप्ति के लिये उत्तराखण्ड के लोगों ने लगभग 50 साल तक संघर्ष किया और एक बड़े अहिंसक आन्दोलन के फलस्वरूप अलग राज्य का निर्माण हुआ। पृथक राज्य निर्माण की मांग पीछे लोगों की यह अपेक्षाएं थी कि अपना राज्य और अपना शासन होगा तो दुश्वारियां कुछ कम होंगी और सामान्य जनता की इच्छानुसार [...]
जी रे जागि रे, जुगराज रे तू- जी रे
तेजी से बदलते भारतीय समाज में अन्य भारतीय परम्पराओं के साथ- साथ संयुक्त परिवार का ताना-बाना भी टूटता जा रहा है। कैरियर और प्रतिस्पर्धा के पीछे भागते-भागते आज का युवावर्ग अपने माता-पिता के रूप में किस अमूल्य निधि का तिरस्कार करता है, उसे आभास नहीं हो पाता। बड़े शहरों में ऐसे कई बुजुर्गों की कहानी [...]



