छैला ओ मेरी छ्बीली..ओ मेरी हेमामालिनी
गोपाल बाबू गोस्वामी ने तरह तरह के गाने गाये हैं। उनका एक गाना है ” छैला ओ मेरी छ्बीली ओ मेरी हेमामालिनी ” जिसमें एक प्रेमी अपनी प्रेमिका की तुलना हेमामालिनी से करता है। निश्चित रूप से तब हेमामालिनी ड्रीम-गर्ल रही होंगी इसलिये प्रेमी अपनी प्रेमिका की तुलना ड्रीम-गर्ल से कर रहा है। आपने “रंगीली [...]
ओ परुवा बॉज्यू चपल के ल्याछा यस
“ओ परुवा बॉज्यू, चपल के ल्याछा यस” एक हल्का-फुल्का गीत है जिसमें पति-पत्नी की मीठी नौंक-झौंक के साथ यह बात एक बार फिर स्पष्ट होती है कि पति बेचारा कुछ भी करले उसकी पत्नी उसके काम में मीन-मेख निकालेगी ही यह एक भुक्त-भोगी पति ही समझ सकता है। इस गाने में ऐसा ही एक बेचारा [...]
विदाई गीत : न रो चेलि न रो मेरि लाल
गोपाल बाबू गोस्वामी ने सब तरह के गाने गाये हैं। उनके गाये हुए विवाह गीतों की चर्चा हम आगे करेंगे, लेकिन आज हम जिस गीत की चर्चा कर रहे हैं वह एक विदाई गीत है, जिसमें अपनी पुत्री को विदा करते समय एक पिता अपनी पुत्री को ढाढस बताते हुए ना रोने की सलाह दे [...]
मथि पहाड़ु बटि, निस गंगाड़ु बटि..उत्तराखण्ड आन्दोलन मां
नरेन्द्र सिंह नेगी की कैसेट “उठा जागा उत्तराखण्ड्यूं” से लिया गया यह गाना ऐसे समय पर गाया गया जब पूरा उत्तराखण्ड पृथक राज्य प्राप्ति की मांग को लेकर उद्वेलित था। पृथक उत्तराखण्ड राज्य की मांग को लेकर आजादी से पहले से ही उत्तर प्रदेश के गढवाल-कुमाऊं के पहाड़ी इलाके के लोग एकजुट होकर प्रयास करने [...]
इखमां छुईं, उखमां छुईं, जखमां देख, तखमां छुई
मानव जीवन में कई तरह की परेशानियां होती हैं लेकिन इस गाने के नायक की परेशानी नारी स्वभाव से जुड़ी एक सामान्य आदत है और वह आदत बकबक बोलने की… नरेन्द्र सिंह नेगी जी के इस व्यंगात्मक गाने में एक ऐसे आदमी का चित्रण किया है जो अपनी पत्नी की छुंयाल (बातूनी) आदत से त्रस्त [...]
पतई कमर तिरछी नजर..हाय हाय रे मिजाता..
गोपाल बाबू गोस्वामी का एक गाना है “पतई कमर तिरछी नजर” जिसमें एक प्रेमी अपनी प्रेमिका के रूप के साथ साथ उसके फैशन की भी तारीफ करता है। यह गाना उस समय लिखा गया था जब पहाड़ों में नये जमाने का फैशन नहीं था। उस समय आंखों का धूप का चश्मा, लिपस्टिक, नेल पॉलिश, हाथ [...]
हाय सुपारी खाय-खाय सुण माया, क्या रामरो घाम लाग्यो छ
‘हाय सुपारी खाय-खाय सुण माया’ गोपाल बाबू गोस्वामी जी द्वारा गाया हुआ गीत है। इसमें एक प्रेमी अपनी प्रेमिका के रूप की प्रसंशा कर रहा है। इसमे एक शब्द ‘रामरो’ का प्रयोग किया गया है। जो मूलत: नैपाली भाषा का शब्द है। इसका अर्थ है अच्छा, ठीक,खुशगवार। भावार्थ : हाय सुपारी खाकर यह धूप कितनी [...]






