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	<title>Comments on: उत्तराखण्ड के विकास में उत्प्रेरक बन सकती हैं रेल परियोजनाएं</title>
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	<description>Uttarakhand Encyclopedia</description>
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		<title>By: Rajesh Joshee</title>
		<link>http://www.apnauttarakhand.com/uttarakhand-train-connectivity-can-boost-development/#comment-386</link>
		<dc:creator>Rajesh Joshee</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 28 Jan 2010 13:17:49 +0000</pubDate>
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		<description>पंत जी 
धन्यवाद काफ़ी महत्व्पूर्ण जानकारी आपने दी। 
पर फ़िर मैं एक बात कहना चाहता हूं कि पहाड़ पर रेलमार्ग बन पाना वर्तमान परिस्थितियों में केवल एक नारा ही हो सकता है।  पंत जी तो उस क्षेत्र से ही हैं, वर्तमान में जब टनकपुर से पिथौरागढ़ की सड़क ही वर्षभर चालू नही रह पाती तो वहां रेल क्या चल पायेगी।  वर्तमान में मैदानी क्षेत्रों में रेल को सरपट दौड़ाने की प्राथमिकता होनी चाहिये नाकि पहाड़ी लोगों की भावानाओं से खिलवाड़।  पहले ही इस राज्य निर्माण के समय इस प्रदेश की पहाड़ी जनता के साथ बहुत मजाक हो चुका है।  मेरा इस आन्दोलन के प्रमुख श्री गुसाईं जी से कहना है कि वो केवल एक क्षेत्र विशेष के बारे में ना सोचकर प्रदेश के व्यापक हित में सोचें।  मेरा बागेश्वर, रुद्र्प्रयाग रेल ले जाने से विरोध नही है मेरा कहना है कि हमे आधारभूत बातों को भी ध्यान देना होगा।  प्रदेश में मैदान के रेल नेटवर्क को मजबूत किया जाना ज्यादा जरूरी है।  मै एक बात दावे से कह सकता हूं कि इन रेलमार्गों को अगर बना भी दिया गया तो इससे प्रदेश के आवागमन में कोई क्रान्ति नही आने वाली है और नाही यह सड़क आवागमन का विकल्प हो सकता है।  हमारे देश में कही भी पहाड़ों पर रेलमार्ग सड़कों का विकल्प नही है।  अगर इस प्रदेश में कोई रेलमार्ग सबसे ज्यादा फ़ायदेमन्द हो सकता है तो वह रायवाला से कोटद्वार, कालागड़ होते हुये रामनगर तक का हो सकता है जिसमें पर्यावरण मंत्रालय से अनापत्ति के अलावा कोई बाधा नही है और इसे बाद में विकासनगर और टनकपुर तक विस्तारित कर फ़िर पहाड़ों पर भी रेल ले जाने के बारे में सोचा जाना चाहिये।  मेरे विचार से टनकपुर - बागेश्वर और ऋषिकेश - रुद्रप्रयाग की तरह ही रामनगर से चौखुटिया-गैरसैण तक भी रेलमार्ग बनाया जा सकता है।   पर हमारी वर्तमान प्राथमिकता हमारे मैदानी रेल नेटवर्क को मजबूत करने की होनी चाहिये।  उसके साथ ही अगर पहाड़ पर भी रेल चढ़ जाये तो फ़िर तो यह इस पहाड़ की जनता के लिये सच्चे अर्थो में एक पहाड़ी राज्य नी परिकल्पना के अनूरूप एक उपहार की तरह होगा। </description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>पंत जी</p>
<p>धन्यवाद काफ़ी महत्व्पूर्ण जानकारी आपने दी।</p>
<p>पर फ़िर मैं एक बात कहना चाहता हूं कि पहाड़ पर रेलमार्ग बन पाना वर्तमान परिस्थितियों में केवल एक नारा ही हो सकता है।  पंत जी तो उस क्षेत्र से ही हैं, वर्तमान में जब टनकपुर से पिथौरागढ़ की सड़क ही वर्षभर चालू नही रह पाती तो वहां रेल क्या चल पायेगी।  वर्तमान में मैदानी क्षेत्रों में रेल को सरपट दौड़ाने की प्राथमिकता होनी चाहिये नाकि पहाड़ी लोगों की भावानाओं से खिलवाड़।  पहले ही इस राज्य निर्माण के समय इस प्रदेश की पहाड़ी जनता के साथ बहुत मजाक हो चुका है।  मेरा इस आन्दोलन के प्रमुख श्री गुसाईं जी से कहना है कि वो केवल एक क्षेत्र विशेष के बारे में ना सोचकर प्रदेश के व्यापक हित में सोचें।  मेरा बागेश्वर, रुद्र्प्रयाग रेल ले जाने से विरोध नही है मेरा कहना है कि हमे आधारभूत बातों को भी ध्यान देना होगा।  प्रदेश में मैदान के रेल नेटवर्क को मजबूत किया जाना ज्यादा जरूरी है।  मै एक बात दावे से कह सकता हूं कि इन रेलमार्गों को अगर बना भी दिया गया तो इससे प्रदेश के आवागमन में कोई क्रान्ति नही आने वाली है और नाही यह सड़क आवागमन का विकल्प हो सकता है।  हमारे देश में कही भी पहाड़ों पर रेलमार्ग सड़कों का विकल्प नही है।  अगर इस प्रदेश में कोई रेलमार्ग सबसे ज्यादा फ़ायदेमन्द हो सकता है तो वह रायवाला से कोटद्वार, कालागड़ होते हुये रामनगर तक का हो सकता है जिसमें पर्यावरण मंत्रालय से अनापत्ति के अलावा कोई बाधा नही है और इसे बाद में विकासनगर और टनकपुर तक विस्तारित कर फ़िर पहाड़ों पर भी रेल ले जाने के बारे में सोचा जाना चाहिये।  मेरे विचार से टनकपुर &#8211; बागेश्वर और ऋषिकेश &#8211; रुद्रप्रयाग की तरह ही रामनगर से चौखुटिया-गैरसैण तक भी रेलमार्ग बनाया जा सकता है।   पर हमारी वर्तमान प्राथमिकता हमारे मैदानी रेल नेटवर्क को मजबूत करने की होनी चाहिये।  उसके साथ ही अगर पहाड़ पर भी रेल चढ़ जाये तो फ़िर तो यह इस पहाड़ की जनता के लिये सच्चे अर्थो में एक पहाड़ी राज्य नी परिकल्पना के अनूरूप एक उपहार की तरह होगा।</p>
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		<title>By: Anonymous</title>
		<link>http://www.apnauttarakhand.com/uttarakhand-train-connectivity-can-boost-development/#comment-59</link>
		<dc:creator>Anonymous</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 29 May 2009 23:27:47 +0000</pubDate>
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		<description>बहुत सुंदर&#8230;..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्&#8205;लाग जगत में स्&#8205;वागत है&#8230;..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्&#8205;दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्&#8205;दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्&#8205;त करेंगे &#8230;..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं। </description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>बहुत सुंदर&hellip;..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्&zwj;लाग जगत में स्&zwj;वागत है&hellip;..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्&zwj;दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्&zwj;दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्&zwj;त करेंगे &hellip;..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।</p>
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		<title>By: Anonymous</title>
		<link>http://www.apnauttarakhand.com/uttarakhand-train-connectivity-can-boost-development/#comment-52</link>
		<dc:creator>Anonymous</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 27 May 2009 15:30:40 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://apnauttarakhand.com/uttarakhand-train-connectivity-can-boost-development/#comment-52</guid>
		<description>कुछ टेक्निकल चीजें - 
टनकपुर से बागेश्वर तक की इस प्रस्तावित योजना की लम्बाई १३७ किलोमीटर है, जिसमें से ६७ कि०मी० लाईन अंतराष्ट्रीय सीमा (भारत-नेपाल) के समानान्तर है और पंचेश्वर से यह योजना सरयू नदी के समानान्तर है। इस कारण इस योजना में कोई सामाजिक विस्थापन भी नहीं होना है, क्योंकि महाकाली और सरयू नदी दोनों भ्रंश घाटियों में बहती हैं। यह घाटियां भौगोलिक स्थिति से काफी मजबूत हैं, इसके अतिरिक्त इस प्रस्तावित योजना में चार बड़े रेल पुलों का निर्माण होना है और इनकी चौड़ाई भी मैदानी क्षेत्रों की तुलना में अत्यन्त कम होगी। 
        पर्वतीय योजनाओं में मुख्य रुप से तकनीकी पक्ष मात्र ऊंचाई ही है, लेकिन इस लाईन को टनकपुर (समुद्र तल से ऊंचाई ८०० मीटर) से बागेश्वर तक पहुंचने में ६१० मीटर की ऊंचाई को पार करना होगा। अन्य पर्वतीय रेल योजनाओं की ऊंचाई की तुलना की जाय तो कालका से शिमला तक से ९८ कि०मी० की दूरी तय करने में १४३३ मीटर की ऊंचाई पार करनी पड़्ती है जब कि इस योजना में १३७ कि०मी० में मात्र ६१० मीटर की ही ऊंचाई को पार करनी पड़ेगी। इसके अतिरिक्त कांगड़ा और कश्मीर की तुलना में और ऊंचाई पार करनी पड़्ती है। </description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>कुछ टेक्निकल चीजें -</p>
<p>टनकपुर से बागेश्वर तक की इस प्रस्तावित योजना की लम्बाई १३७ किलोमीटर है, जिसमें से ६७ कि०मी० लाईन अंतराष्ट्रीय सीमा (भारत-नेपाल) के समानान्तर है और पंचेश्वर से यह योजना सरयू नदी के समानान्तर है। इस कारण इस योजना में कोई सामाजिक विस्थापन भी नहीं होना है, क्योंकि महाकाली और सरयू नदी दोनों भ्रंश घाटियों में बहती हैं। यह घाटियां भौगोलिक स्थिति से काफी मजबूत हैं, इसके अतिरिक्त इस प्रस्तावित योजना में चार बड़े रेल पुलों का निर्माण होना है और इनकी चौड़ाई भी मैदानी क्षेत्रों की तुलना में अत्यन्त कम होगी।</p>
<p>        पर्वतीय योजनाओं में मुख्य रुप से तकनीकी पक्ष मात्र ऊंचाई ही है, लेकिन इस लाईन को टनकपुर (समुद्र तल से ऊंचाई ८०० मीटर) से बागेश्वर तक पहुंचने में ६१० मीटर की ऊंचाई को पार करना होगा। अन्य पर्वतीय रेल योजनाओं की ऊंचाई की तुलना की जाय तो कालका से शिमला तक से ९८ कि०मी० की दूरी तय करने में १४३३ मीटर की ऊंचाई पार करनी पड़्ती है जब कि इस योजना में १३७ कि०मी० में मात्र ६१० मीटर की ही ऊंचाई को पार करनी पड़ेगी। इसके अतिरिक्त कांगड़ा और कश्मीर की तुलना में और ऊंचाई पार करनी पड़्ती है।</p>
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		<title>By: ALBELA KHATRI</title>
		<link>http://www.apnauttarakhand.com/uttarakhand-train-connectivity-can-boost-development/#comment-44</link>
		<dc:creator>ALBELA KHATRI</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 26 May 2009 21:08:49 +0000</pubDate>
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		<description>atyant mahatvapoorna jaankari aur rochak aalekh k liye  
HARDIK BADHAI </description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>atyant mahatvapoorna jaankari aur rochak aalekh k liye </p>
<p>HARDIK BADHAI</p>
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